Hindi Murli Quiz 16-07-2017

10 Questions | Total Attempts: 241

SettingsSettingsSettings
Please wait...
Hindi Murli Quiz 16-07-2017

.


Questions and Answers
  • 1. 
    Q. “स्नेही आत्मायें तो सभी बच्चे हो, स्नेह के शुद्ध-सम्बन्ध से यहाँ तक पहुँचे हो। फिर भी स्नेह में भी नम्बरवार हैं--कोई स्नेह में समाई हुई आत्मायें हैं, कोई मिलन मनाने के अनुभव को यथाशक्ति अनुभव करने वाले हैं और कोई इस रूहानी मिलन मेले के आनन्द को समझने वाले, समझने के प्रयत्न में लगे हुए हैं। फिर भी सभी को कहेंगे स्नेही-आत्मायें। स्नेह के सम्बन्ध के आधार पर आगे बढ़ते हुए समाये हुए स्वरूप तक भी पहुँच जायेंगे क्योंकि बाप समान बनना अर्थात् स्नेह में समा जाना।”  
    • A. 

      True

    • B. 

      False

  • 2. 
    Q.“बाप समान अर्थात संकल्प, वाणी, कर्म, सेवा, सम्बन्ध सब में बाप समान होनाI अन्तर समाप्त होना ही मनमनाभवका महामंत्र है। इस महामंत्र को हर संकल्प और सेकण्ड में--------में लाना, इसी को ही समान और समाई हुई आत्मा कहा जाता है।”निम्नलिखित विकल्पों में से एक सबसे सटीक शब्द से उपरोक्त रिक्त स्थान भरें I 
    • A. 

      स्वरूप

    • B. 

      यूज़

    • C. 

      व्यवहार

    • D. 

      ध्यान

  • 3. 
    Q. “बाप का दिलतख्त इतना बड़ा है जो सारे विश्व की आत्मायें भी समा सकती हैं लेकिन बैठने की हिम्मत रखने वाले कितने बनते हैं! क्योंकि दिलतख्तनशीन बनने के लिए दिल का सौदा करना पड़ता है इसलिए बाप का नाम----------- पड़ा है। तो दिल लेता भी है, दिल देता भी है।”निम्नलिखित विकल्पों में से एक सबसे सटीक शब्द से उपरोक्त रिक्त स्थान भरें I 
    • A. 

      दिलवाला

    • B. 

      सौदागर

    • C. 

      भोलेनाथ

    • D. 

      चतुरसुजान

  • 4. 
    Q. “दिल के टुकड़े-टुकड़े नहीं करो। आज अपने से दिल हटाकर बाप से लगाई, एक टुकड़ा दिया अर्थात् एक किश्त दी। फिर कल सम्बन्धियों से दिल हटाकर बाप को दी, दूसरी किश्त दी, दूसरा टुकड़ा दिया, इससे बाप की प्रापर्टी के अधिकार के भी टुकड़े के हकदार बनेंगे। प्राप्ति के अनुभव में सर्व अनुभूतियों के अनुभव को पा नहीं सकेंगे। थोड़ा-थोड़ा अनुभव किया इससे सदा सम्पन्न, सदा सन्तुष्ट नहीं होंगेI” 
    • A. 

      True

    • B. 

      False

  • 5. 
    Q. केवल सही वाक्य ही चयन करें --- 
    • A. 

      जो परिस्थिति और समय अनुसार अपनी श्रेष्ठ स्थिति बना सकें, कैसा भी त्याग उसके लिए करना पड़े तो कर लें, अपने को मोल्ड कर लें इसको कहा जाता है त्याग मूर्त।

    • B. 

      तपस्या अर्थात एक बाप दूसरा न कोई - यह है हर समय की तपस्या।

    • C. 

      सेवाधारी सदा यही चाहते हैं कि सफलता हो लेकिन सफल होने का आधार है- त्याग और तपस्या। तो सेवाधारी अर्थात् त्याग मूर्त और तपस्वी मूर्त।

    • D. 

      वरदानी बनना है तो अभी बनो, फिर वरदान का समय भी समाप्त हो जायेगा। फिर मेहनत से भी कुछ पा नहीं सकेंगे।

    • E. 

      परिस्थिति के आगे स्व-स्थिति कुछ कर नहीं सकती। विघ्न-विनाशक आत्माओं के आगे विघ्न पुरुषार्थ में रुकावट डाल सकता है ।

  • 6. 
    Q. “संगमयुग का एक सेकण्ड और युगों के एक वर्ष से भी ज्यादा है, इस समय एक सेकण्ड भी गंवाया तो सेकण्ड नहीं लेकिन बहुत कुछ गंवाया। इतना महत्व सदा याद रहे तो हर सेकण्ड परमात्म दुआयें प्राप्त करते रहेंगे और जिसकी झोली परमात्म दुआओं से सदा भरपूर है उसके पास कभी माया आ नहीं सकती। दूर से ही भाग जायेगी। तो समय को बचाना-यही तीव्र पुरूषार्थ है। तीव्र पुरूषार्थी अर्थात् सदा मायाजीत।” 
    • A. 

      True

    • B. 

      False

  • 7. 
    Q. “जो आज्ञाकारी हैं वही बाप की वा --------की दुआओं के पात्र हैं।”निम्नलिखित विकल्पों में से एक सबसे सटीक शब्द से उपरोक्त रिक्त स्थान भरकर स्लोगन पूरा करेंI 
    • A. 

      परिवार

    • B. 

      समाज

    • C. 

      संसार

Back to Top Back to top