Hindi Murli Quiz 05-07-2015

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Hindi Murli Quiz 05-07-2015

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Questions and Answers
  • 1. 
    Q. निम्नलिखित रिक्त स्थान भरें --–“बाप-दादा ने हरेक बच्चे के मस्तक पर दो ----------देखे- राजयोगी अर्थात् `स्मृति भव' का ---------- और साथ-साथ विश्व-राज्य-अधिकारी का राज---------।“ 
  • 2. 
    Q. बाप-दादा ने तीन प्रकार के राजयोगी-तिलक देखे, उनका सही सही चयन करें --- 
    • A. 

      किसी के मस्तक पर तीन बिन्दियों का तिलक देखा ।

    • B. 

      किसी के मस्तक पर दो बिन्दी का तिलक देखा I

    • C. 

      किसी के मस्तक पर एक बिन्दी का ही तिलक था I

    • D. 

      किसी के मस्तक पर शंख के रूप का तिलक देखा I

    • E. 

      किसी के मस्तक पर त्रिशूल के रूप का तिलक देखा ।

  • 3. 
    Q. “वास्तव में नॉलेजफुल बाप द्वारा विशेष तीन स्मृतियों का तीन बिंदियों के रूप में तिलक दिया हुआ है I यह तीन स्मृतियाँ हैं - एक स्वयं की स्मृति, दूसरी बाप की स्मृति और तीसरी ड्रामा के नॉलेज की स्मृति। नॉलेज के वृक्ष की यह तीन स्मृतियाँ हैं। इसमें मुख्य हैं बीज बाप की स्मृति। फिर दो पत्ते अर्थात् विशेष स्मृतियाँ - आत्मा की सारी नॉलेज और ड्रामा की स्पष्ट नॉलेज। इन तीन स्मृतियों के आधार पर मायाजीत जगतजीत बन जाते हैं। लेकिन एक ही समय पर तीनों स्मृति साथ-साथ नही रहती । कभी एक स्मृति रह जाती, कभी दो और कभी तीन“
    • A. 

      True

    • B. 

      False

  • 4. 
    Q. तीन बिन्दी अर्थात् त्रि-स्मृति स्वरूप पर आधारित इस एक्सरसाइज में केवल सही वाक्यों का चयन करें ---- 
    • A. 

      सम्पूर्ण विजयी की निशानी है - तीन बिन्दी अर्थात् त्रि-स्मृति स्वरूप।

    • B. 

      अच्छे-अच्छे बच्चे भी देखे जो निरन्तर तीन स्मृति के तिलकधारी हैं I

    • C. 

      संगमयुगी राजयोगियों को सदा विनाशी तिलकधारी होना है।

    • D. 

      रोज अमृतवेले इस त्रि-स्मृति के अविनाशी तिलक को चेक करो I

    • E. 

      तीन स्मृति-स्वरूप अर्थात् सर्व समर्थ स्वरूप। इसके आगे माया के व्यर्थ रूप समाप्त हो जाते हैं।

  • 5. 
    Q. “इन तीन स्मृतियों के आधार पर पाँचों विकारों का परिवर्तन कर सकते हो। काम के रूप में आये और शुभ भावना बन जाए, तब माया-जीत जगतजीत का टाइटिल मिलेगा। यह नियम है कि जो जिस पर विजय प्राप्त करता है उसको बन्दी बनाकर रखते हैं । आप भी इन पाँच विकारों के ऊपर विजयी बनते हो। आप इनको बन्दी नहीं बनाओ। बन्दी बनायेंगे तो फिर अन्दर उछलेंगे। लेकिन आप इन्हें परिवर्तित कर सहयोगी-स्वरूप बना दो। तो सदा आपको सलाम करते रहेंगे।“
    • A. 

      True

    • B. 

      False

  • 6. 
    Q. त्रि-स्मृति का अविनाशी तिलक समर्थ का तिलक है इसके आगे माया के पाँच रूप अर्थात पांच विकार पाँच दासियों के रूप में बदल जायेंगे। आपकी सेवा के सहयोगी, आपकी श्रेष्ठ शक्तियों के स्वरूप में परिवर्तित हो जायेंगे। विकारों के इस परिवर्तन को निम्नलिखित विकल्पों में से सही वाक्यों द्वारा स्पष्ट करें---  
    • A. 

      काम विकार शुभ कामना के रूप में आपके पुरूषार्थ में सहयोगी रूप बन जायेगा।

    • B. 

      क्रोध विकार सहन-शक्ति के रूप में परिवर्तित हो आपका एक शस्त्र बन जायेगा।

    • C. 

      लोभ विकार ट्रस्टी रूप की अनासक्त वृत्ति, बेहद की वैराग्य वृत्ति के रूप में परिवर्तित हो जायेगी।

    • D. 

      मोह विकार वार करने के बजाए स्नेह के स्वरूप में बाप की याद और सेवा में विशेष साथी बन जायेगा।

    • E. 

      अहंकार विकार देह-अभिमान से परिवार्तित हो स्वाभिमानी बन जायेगा जो चढ़ती कला का साधन है।

  • 7. 
    Q. “आज्ञाकारी बच्चे ही -----------के पात्र हैं, ------------का प्रभाव दिल को सदा सन्तुष्ट रखता है।“[निम्नलिखित विकल्पों में से एक सबसे सटीक शब्द से उपरोक्त दोनों रिक्त स्थान भरें ] 
    • A. 

      दुआओं

    • B. 

      दया

    • C. 

      रहम

    • D. 

      इनाम

  • 8. 
    Q. “मनन शक्ति ही दिव्य बुद्धि की खुराक है। रोज अमृतवेले अपने एक टाइटल को स्मृति में लाओ और मनन करते रहो तो मनन शक्ति से बुद्धि शक्तिशाली रहेगी। शक्तिशाली बुद्धि के ऊपर माया का वार नहीं हो सकता, क्योंकि माया सबसे पहले व्यर्थ संकल्प रूपी वाण द्वारा दिव्यबुद्धि को ही कमजोर बनाती है I इस कमजोरी से बचने का साधन ही है मनन शक्ति।“
    • A. 

      True

    • B. 

      False

  • 9. 
    Q. केवल सही वाक्य ही चयन करें --- 
    • A. 

      विजय प्राप्त करने का साधन है, स्व-स्थिति द्वारा परिस्थिति पर विजय। देह के भान में आना, यह भी स्वस्थिति नहीं है।

    • B. 

      स्व-स्थिति सदा सुख का अनुभव करायेगी और प्रकृति-धर्म अर्थात् देह की स्मृति किसी-न-किसी प्रकार के दु:ख का अनुभव करायेगी।

    • C. 

      संकल्प में भी अगर दु:ख की लहर आई, तो सिद्ध है कि स्वस्थिति से वा स्वधर्म से नीचे आ गये।

    • D. 

      याद के साथ-साथ सहजयोगी, निरन्तर योगी हो। अगर यह नहीं तो याद भी अधूरी रहेगी।

    • E. 

      भक्ति मार्ग में गुरू कृपा गाई हुई है परन्तु ज्ञान-मार्ग में सतगुरू की कोई कृपा नही होती ।

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